जिला सिरसा शिक्षा क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है, और इसी कड़ी में एक नया नाम जुड़ा है — कल्पना, गांव केहरवाला की बेटी, जिसने बिना किसी कोचिंग संस्थान में गए NIT कुरुक्षेत्र जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में कंप्यूटर साइंस ब्रांच में प्रवेश प्राप्त किया है।
कल्पना की सफलता इस मायने में खास है कि उन्होंने न कोटा का रुख किया, न सीकर जैसे कोचिंग हब में कोई कोर्स किया। उन्होंने अपने गांव के ही स्वामी विवेकानंद स्कूल में रहकर पढ़ाई की और कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
बिना कोचिंग, खुद के दम पर तैयारी
कल्पना ने JEE Main की परीक्षा में अच्छा स्कोर किया और काउंसलिंग प्रक्रिया में उन्हें NIT कुरुक्षेत्र में कंप्यूटर साइंस ब्रांच मिल गई। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कोचिंग क्लासेस के दबाव या खर्चे के बिना, गांव के सीमित संसाधनों में रहकर पूरे आत्मविश्वास और लगन से पढ़ाई की।
स्कूल में जश्न का माहौल
जैसे ही यह खबर फैली कि गांव की बेटी ने NIT में सीट प्राप्त की है, पूरे स्कूल और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। स्वामी विवेकानंद स्कूल में मिठाई बांटी गई और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने गर्व से कहा कि कल्पना की मेहनत और लगन का फल है यह सफलता। स्कूल के डायरेक्टर रामजीलाल गोदारा ने भी इस उपलब्धि के लिए कल्पना और उनके परिवार को बधाई दी।
परिवार ने जताया आभार
कल्पना के माता-पिता ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और स्कूल प्रशासन का भी सहयोग हर कदम पर मिला। परिवार का कहना है कि आज भी गांव के बच्चे अगर सच्ची मेहनत करें तो शहरों की कोचिंग के बिना भी बड़ी कामयाबी पाई जा सकती है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए मिसाल
कल्पना की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी किसी से कम नहीं हैं। यदि सही मार्गदर्शन और समर्पण हो, तो गांव से निकलकर भी देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों तक पहुंचा जा सकता है।
यह सफलता उन हजारों ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक मिसाल है जो आर्थिक, सामाजिक या संसाधनों की कमी के कारण खुद को पीछे समझते हैं। कल्पना ने दिखा दिया कि अगर जज्बा हो, तो रास्ते खुद बनते हैं।
क्या हैं, भविष्य की योजना
कल्पना का कहना है कि वह कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डेटा साइंस जैसे विषयों में गहराई से अध्ययन करेंगी। उनका सपना है कि वह न केवल खुद एक सफल इंजीनियर बनें बल्कि भविष्य में ग्रामीण छात्रों को भी गाइड कर सकें।
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